Thursday, April 2, 2009

आत्महत्य

अतिदुर्लभालु, केवलं भगवदनुग्रह हेतुकालु अयिनवि मूडुन्नवि.
अवि:
1. मानवजन्म
2. मुमुक्षुत्वं
3. महापुरुषुल आश्रयं
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ऎट्लैना मानवजन्म पॊंदि, अंदुना पुरुष शरीरं दाल्चि, आपै वेदाध्ययनं कूडा चेसि, अप्पटिकी आत्म साक्षात्कारानिकै प्रयत्निंचनि मनिषि अनित्यवस्तुवुलपट्ल आसक्तुडै आत्महत्ये चेसिकॊंटुन्नाडु.
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---श्री शंकर उवाच नुंचि

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